TAN DOHA MAN MUKTIKA (तन दोहा मन मुक्तिका)

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'मुक्तक-लोक' का यह तृतीय पुष्प गुच्छ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अत्यंत हर्षित और प्रमुदित हूँ। 'विहग प्रीति के' मुक्तक- संग्रह के प्रकाशन और लोकार्पण के साथ मुक्तक-लोक ने नई दिल्ली में पहला कदम रखा, भारी संख्या में समूह के सदस्यों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने अद्भुत उत्साह का संचार किया। इसके पश्चात द्वितीय पुष्प खिला 'गीतिका है मनोरम सभी के लिए', गीतिका-संकलन, मुक्तक- लोक की अनूठी उपलब्धि, जिसमें 90 रचनाकारों की रचनाएँ समाहित थीं, इसका भव्य लोकार्पण मध्य-प्रदेश की साहित्यिक राजधानी भोपाल में हुआ, इसके प्रकाशन, लोकार्पण एवं वृहद आयोजन का दायित्व मुक्तक- लोक की मध्य-प्रदेश इकाई द्वारा किया गया। तृतीय पुष्प के रूप में नव-विधा दोहा-मुक्तकों का अनूठा संकलन 'तन दोहा मन मुक्तिका' आपके हाथों में है। मित्रो, चार वर्षों की इस अल्पावधि में अपनी संकल्प यात्रा में अनेक साहित्य-सेवी सार्थक सृजन के इस सम्पूर्ण हिन्दी पटल से जुड़ते चले गये हैं, जो राष्ट्रवाणी को अपने अवदान से निरंतर समृद्ध करते जा रहे हैं। यह छोटा सा समूह, आज सहस्रों रश्मि-पुंजों संग हिन्दी कविता के अद्भुत साहित्याकाश को आलोकित कर रहा है। विविध विधाओं का यह पटल पूर्णतः हिन्दी कविता को समर्पित है। सभी विधाओं का यह स्नेहांगन केवल मुक्तकों तक ही सीमित नहीं है, मुक्तक-लोक एक इन्द्रधनुषी संकल्प है, सुगम-सहज-सार्थक-सृजन का यह मंच प्रतिदिन स्वर्णिम भोर के संग रचनाकारों का अभिनन्दन करते हुए सृजन के द्वार खोलता है। नवांकुर और स्थापित हस्ताक्षर, शब्दों की तूलिका से जीवन के विविध रंग, ढंग और प्रसंग के चित्र उकेरते हैं।

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‘मुक्तक-लोक’ का यह तृतीय पुष्प गुच्छ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अत्यंत हर्षित और प्रमुदित हूँ। ‘विहग प्रीति के’ मुक्तक- संग्रह के प्रकाशन और लोकार्पण के साथ मुक्तक-लोक ने नई दिल्ली में पहला कदम रखा, भारी संख्या में समूह के सदस्यों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने अद्भुत उत्साह का संचार किया। इसके पश्चात द्वितीय पुष्प खिला ‘गीतिका है मनोरम सभी के लिए’, गीतिका-संकलन, मुक्तक- लोक की अनूठी उपलब्धि, जिसमें 90 रचनाकारों की रचनाएँ समाहित थीं, इसका भव्य लोकार्पण मध्य-प्रदेश की साहित्यिक राजधानी भोपाल में हुआ, इसके प्रकाशन, लोकार्पण एवं वृहद आयोजन का दायित्व मुक्तक- लोक की मध्य-प्रदेश इकाई द्वारा किया गया। तृतीय पुष्प के रूप में नव-विधा दोहा-मुक्तकों का अनूठा संकलन ‘तन दोहा मन मुक्तिका’ आपके हाथों में है। मित्रो, चार वर्षों की इस अल्पावधि में अपनी संकल्प यात्रा में अनेक साहित्य-सेवी सार्थक सृजन के इस सम्पूर्ण हिन्दी पटल से जुड़ते चले गये हैं, जो राष्ट्रवाणी को अपने अवदान से निरंतर समृद्ध करते जा रहे हैं। यह छोटा सा समूह, आज सहस्रों रश्मि-पुंजों संग हिन्दी कविता के अद्भुत साहित्याकाश को आलोकित कर रहा है। विविध विधाओं का यह पटल पूर्णतः हिन्दी कविता को समर्पित है। सभी विधाओं का यह स्नेहांगन केवल मुक्तकों तक ही सीमित नहीं है, मुक्तक-लोक एक इन्द्रधनुषी संकल्प है, सुगम-सहज-सार्थक-सृजन का यह मंच प्रतिदिन स्वर्णिम भोर के संग रचनाकारों का अभिनन्दन करते हुए सृजन के द्वार खोलता है। नवांकुर और स्थापित हस्ताक्षर, शब्दों की तूलिका से जीवन के विविध रंग, ढंग और प्रसंग के चित्र उकेरते हैं।

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